जान लेना नहीं , जान देना है अज मुझे
रहना मुश्किल हो गया उसके बिना
यादो ने पागल किया है उसके इतना
आज रोकना नहीं मुझे
आज टोकना नहीं मुझे
उसकी आखो में देखने की ख्वाइश है,
कुछ सवाल अश्क बनके रहते है आखो में
बहने दो हथेली पे उसके तोह उनका कोई जवाब आये
वो आज खुश है जरुर
लेकिन मेरी याद हर पल में होंगी
मेरा यकीं है ये ...
वो हस्त जरुर हा , लेकिन मुश्कान उसके लाबो पे मेरी ही होंगी
सपने सारे सच किये होंगे उसने अपने
सपनो की सौगात दी तोह मैंने थी
हकीकत है , ज़िन्दगी मेरे बिना जीता है वो
हर सांस , लेती मेरा नाम है उसकी
सामने उसको होंगी कोई और द्दिल्रुबा आज
बंद आखो में तस्वीर सिर्फ मेरी है ...
उसकी खिलखिलाती ज़िन्दगी में ,
मेरे ना होने का अफ़सोस आज भी है ....
एक सवाल उसके ज़ेहन में उठता हर रोज़ है
जिसका जवाब वो जनन्ना नहीं चाहता ....
क्युकी!
उसका और मेरा वास्ता आब उस एक सवाल से जो है
मैं क्यों नहीं उसकी,
व क्यों नहीं मेरा।।।।।
जबकि महसूस वो करता आज भी सिर्फ मुझको है ....
उसके रूह में बस्ती थी मैं,
मारके भी जुदा वो ना कर पायेगा।।।
दुनिया वाले क्या समजेगे
मेरे उसके साथ की दस्तान्न कोई नहीं लिख पायेगा
एक जनम अभी आना है बाकी,
जब हम भी होंगे साथ साथ
इस्सी उमीद के साथ तोह जुदा होते है हर ज़नम
वो ज़नम कभी तोह आएगा।।
येही सोचके रूह में बसते है हम तेरे सामान
तेरी याद में
तेरी ही याद हु मैं
तूने जो नाम दिया था।।
आज भी वोही नाम से जानी जाती हु मैं !!!

siply wow... amazing poem.... gr8 work
ReplyDeleteThank you Aakash, I appreciate your time for reading this. it motivates me
DeleteMarvellous!
ReplyDeleteAapki ye kavita hame zindagibhar yad aati rahegi.
ReplyDelete