कहते है, पिने का दूसरा नाम मुहोबत है,
कल हमने भी एक जाम लगाया ,
होश में भी वो ....
बेहोशी में भी वो ही नज़र आया !
किसी शराब में वो नशा नहीं रहा, जो उसका नशा उतार दे ....
मयखानों वालो सुनलो!
.....की मयखानों के बंद होने का वक़्त आ गया,
दीवानों सुन लो !
..... की आज फिर उसके यहाँ से गुजरने का वक़्त आ गया!
फिर से वो मुश्कान जाम छल्काएगी ,
मैं बेहोश और दुनिया दीवानी हो जायेगी !
उसकी चूडियो की खनक फिजाओ को नचाएगी ,
उसकी खुशबु आज फिर फूलो को महकाएगी !
जाम पे जाम लगेगे यहाँ ,
की सूरत उनकी नजरो के सामने है!
मदहोशी भी छाएगी ,बेहोशी भी छाएगी ,
की आज होनी मुलाकात उनसे है !!
मेरा खत्ल होने वाला है यहाँ,
मुलाकात ज़िन्दगी से जो होनी है !
आज अश्क को न रोक पाओगे मेरे ,
मुस्कान मेरे चेहरे पे जो आणि है!!
पिला दो यारो मुझे आज इतना ,
की मैं होश में ना रहू,
वरना मेरी हालत के लिए,
बदनाम तोह वो आज होनी है!!
चाहे जो समज लो पिने वालो,
नशा तोह मेरे महबूब में है !
उसकी बातो में है,
उसकी चाहतो में है।
मयखानों की बाते करते है वो !!
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