Friday, December 14, 2012






मयखानो की बाते करते है वो, 
कहते है, पिने का दूसरा नाम मुहोबत है, 
कल हमने भी एक जाम लगाया ,
होश में भी वो ....
बेहोशी में भी वो ही नज़र आया !

किसी शराब में वो नशा नहीं रहा, जो उसका नशा उतार दे ....
मयखानों वालो सुनलो! 
.....की मयखानों के बंद होने का वक़्त आ गया, 
दीवानों सुन लो !
..... की आज फिर उसके यहाँ से गुजरने का वक़्त आ गया! 
फिर से वो मुश्कान जाम छल्काएगी , 
मैं बेहोश और दुनिया दीवानी हो जायेगी !
उसकी चूडियो की खनक फिजाओ को नचाएगी , 
उसकी खुशबु आज फिर फूलो को महकाएगी !

जाम पे जाम लगेगे यहाँ , 
की सूरत उनकी नजरो के सामने है!
मदहोशी भी छाएगी ,बेहोशी भी छाएगी , 
की आज होनी मुलाकात उनसे है !!

मेरा खत्ल  होने वाला है यहाँ, 
मुलाकात ज़िन्दगी से जो होनी है ! 
आज अश्क को न रोक पाओगे मेरे ,
मुस्कान  मेरे चेहरे पे जो आणि है!!

पिला दो यारो मुझे आज इतना , 
की मैं होश में ना रहू, 
वरना मेरी हालत के लिए, 
बदनाम तोह वो आज होनी है!! 

चाहे जो समज लो पिने वालो, 
नशा तोह मेरे महबूब में है !
उसकी बातो में है, 
उसकी चाहतो में है। 
मयखानों की बाते करते है वो !!

No comments:

Post a Comment