Monday, March 25, 2013

Main Hu waisi, Jaisi main HOON!


मैं हु वैसी... जैसी!!


मै हु वैसी जैसी मै हु...
दुनिया जैसी मै बन जाऊ,
तो कहा रह पाऊँगी वैसी,
जैसी मैं हु
मैं हु वैसी जैसी मै हु...

मुझे प्यार है खुदसे ,
उसी तरह
जैसे है कुदरत से,
हां तुमसे फूलो से,
बारिश से,हवाओ से,
धूप से
छाव से
मै हु वैसी जैसी मै हु...
नहीं बनना है मुझे औरो सा..
बन जाओ जैसे दुनिया चाहे,
तो कैसे कहूँगी मैं,
मैं हु वैसी जैसी मै हु....
,
की है कई गलतिय मैंने तो,
खुशिया भी तो देती हु,
तभी तो अलग तुमसे,
इस दुनिया से हु,
मै हु वैसी जैसी मै हु...

Sunday, March 24, 2013

Nawya - बिंदिया की बिंदिया

Nawya - बिंदिया की बिंदिया



By PDPLOS payday loans

बिंदिया की बिंदिया

                                                     
24 March 2013

MOTHER-CHILD-55
बिंदिया ओ बिंदिया
माँ बुलाती लाड ,दुलार से बिंदिया
बापू भी बुलाते लाड दुलार से बिंदिया ,
....भाई बुलाता इतराते हुए बिंदिया ..
 “बिंदिया ओ मेरी बिंदिया “|

बिंदिया सबकी प्यारी ,राज दुलारी ,
हसंते हँसते जीती ,खेलती ,सपने बुनती ,
वो सबको हँसाती,बिंदिया वो प्यारी बिंदिया ||
... 

बचपन उसका ,हँसना उसका, खेलना उसका ,
लोगों को अच्छा ना लगा ,
वो बिंदिया ,कहां खो गयी वो बिंदिया ?

चीर चीर कर दिया,उसको रुलाके ही दम लिया |
सपनों का कच्चा सा  खिलौना उछला ,
उसका मासूम दिल तोड़कर पत्थर का बना दिया ,
वो रोई खूब रोई ,और रोते रोते वो हँसने लगी ||

माँ  आज भी बुलाती ‘बिंदिया ओ बिंदिया ‘
बापू प्यार से आवाज लगाते बिंदिया ओ बिंदिया
भाई इतराते हुए बुलाता बिंदिया ओ बिंदिया

बिंदिया अब नहीं आती
बिंदिया अब नहीं मुस्कुराती ,
वो बिंदिया की बिंदिया कोई चुरा ले गया
उसका बचपन को ,मासूम दिल को ,पत्थर का बना गया ||

बिंदिया ओ बिंदिया
एक बार तू लौट आ
फिर से कही नजर तो आ ||

Nawya - बिंदिया की बिंदिया

Nawya - बिंदिया की बिंदिया

Friday, March 15, 2013

Kishto me zindagi....


किश्तों में ज़िन्दगी ! 

मुझे किश्तों में  है ज़िन्दगी!
खुशिया भी किश्तों में थी ..... 
गम भी किश्तों में!
रोया भी मैंने किश्तों में है… 
हँसा भी मैंने किश्तों में !

हारके जीत भी किश्तों में मिली, और
जीत के बाद हार भी किश्तों में मिली !
और प्यर… 
हाँ प्यार भी किश्तों में मिला!

मेरी ज़िन्दगी एक कर्ज है ..
ना जाने किसपे , 
या किसका कर्ज है !
मैंने ज़िन्दगी से मुलाकात भी की है किश्ती में !!

जीना यहाँ किश्तों में !
खुदा तेरी रहमत को क्या शब्द दू ....
तूने मुझे दिखाई मौत भी है किश्तों में !!

किश्तों में ज़िन्दगी 
किश्तों की ज़िन्दगी ! 
एक उधार है शिन्दगि. 
एक लम्हा, जो जीना बाकी है, वो है ज़िन्दगी 

मेरे सपने, कोई लम्हा, कोई फासला,, कुछ दुरिया ,कुछ नज्दिकिया ...
 ये सबकी बाकी है किश्तिया !
मेरा कुछ और जीना, मेरा कुछ और मरना है बाकि… 
बाकी है कुछ और किश्तिया !.