मैं हु वैसी...
जैसी!!
मै हु वैसी जैसी मै हु...
दुनिया जैसी मै बन जाऊ,
तो कहा रह पाऊँगी वैसी,
जैसी मैं हु
मैं हु वैसी जैसी मै हु...
मुझे प्यार है खुदसे ,
उसी तरह
जैसे है कुदरत से,
हां तुमसे फूलो से,
बारिश से,हवाओ से,
धूप से
छाव से
मै हु वैसी जैसी मै हु...
नहीं बनना है मुझे औरो सा..
बन जाओ जैसे दुनिया चाहे,
तो कैसे कहूँगी मैं,
मैं हु वैसी जैसी मै हु....
,
की है कई गलतिय मैंने तो,
खुशिया भी तो देती हु,
तभी तो अलग तुमसे,
इस दुनिया से हु,
मै हु वैसी जैसी मै हु...

