वो मुझे बस देखा करता था कभी।।।।
आखो में भर लेता मेरी हंसी,
पढ़ लिया करता था वो , मेरे आखो की नमी
एक हरकत अखियो की होती , वो जान लेता पूरी कहानी मेरी !
वो तस्वीर बनाना चाहता था मेरी
रंगों को खोजता रहता,
कभी फूलो के पास जाता,
कभी इन्द्रधनुष से रंग मांगता !
वो तस्वीर बनाना चाहता था मेरी
दीवाना वो , नदियों की उमंग डालना चाहता था वो
तितलियो सी मस्ती भरना चाहता था वो ...
हंसी फूलो सी लगती उससे,
वो तारीफ करना चाहता था मेरी !
वो तस्वीर बनाना चाहता था मेरी
हथेली पे, वो अपना नाम लिखना चाहता था मेरी
सोचा करता , काली खता कहा से लाऊ????
जो तेरे बालो को दर्शा सके
मैं वो पहेली बारिश की बूंद कहा से लाऊ??
जो माथे की बिंदी बन सके तेरे !
पागल था वो दीवाना था वो,
एक तस्वीर बने थी उसने मेरी
मुझे खुदसे प्यार करना सिखाया था उसने,
वो आखे कहा से लाऊ ,
वो तस्वीर बनाने वाला , मैं कहा से लाऊ???
वो आखे मैं कहा से लाऊ?????

behtreen......................
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