Sunday, November 10, 2013

अश्क

अश्क बड़े बेईमान होते है
ख़ुशी में हर वक़्त मेरे साथ ,
गम में बएहने लगते है।

Thursday, November 7, 2013

kon hu main ?

 kitna bebas hu aaj main..
aaj apne se mulakat nahi hoti..
ittna intejaar karwaya sunne ko khudko..
ki aab sunna chahu bhi toh , khudki aawaj nahi aati..

dil hasta tha, main nahi hasa uske saath, wyast tha 
dil rota tha ,main nahi roya uske saath, main wayst tha..
aab rone ,hasne ki aawaje band hai, dil zinda toh hai na?
kisse puchu, wo kuch dino pehele mara toh nahi tha….?

uske aane ki aahat se dil ki dharkan tej hoi thi..
uske jaane se dil dhartka hai bhi ki nahi maloom nahi..
par..
aab kisi ke zanzhorne se bhi halchal nahi hoti..

mera wajood banane chala tha
main khud kho gaya..
aab shabdo me khudko ko khojta hu
suna hai, ye amar hote hai… 

aasmano me aapna naam likhna chahta tha..
udta gaya, udta gaya.. 
aasman toh ab bhi dur tha, aur dharti tak lautna naamumkin..
mai , main bichme hi kahi akela reh gaya..

kitna bebas hu aaj main..
kon hu kon hu, ye puch raha hu.. 
log batate hai, main kon tha, main kon ban sakta hu..
main kon hu ye koi nahi jaanta ..

pag ke nisha.....

pag ke nisha.....

pag dandio pe kuch pag ke nishan kaise reh gaye the baaki.
ye wo kache raste hai, 
jaha se gujarta koi khas nahi
koi purani yaad bhatakti hai yaha..
bachpan ke din bite the yaha..---

kheto me se jaate ye pagdandio pe kuch pago ke nishan dikhai dete hai aaj bhi..
mai bhul gaya in rasto ko..
raste nahi bhule,,
aapni meetti me , aapni aagosh me bhar rakha hai mujhe..

ubad khabad chote mote, tede mede, in pathrile rasto pe..

mera bachpan bita tha..
ek din yahi se gujarkar mai shehar gaya tha..
mai nahi louta.. 

mai bhul gaya..
phir kyu mere nishan samale hai..
tum bhi bhul jaao..
zehan se aapne meri yaade mita daalo..
kuch naye pag chalke jaayege yaha se..
tum kya unke bhi nishan yuhi samaloge…..???

sabko kaise sama lete ho.. jaane kitno ke, par itne nishan kaise basa lete ho..
duniya kitni bhi dekh li ho maine.. meri pehchan mujhe yahi mili hai…
mujhe jannae waala koi nahi hai..
mere nishan bas yahi mile hai….

pagdandi pe dikhte kuch pago ke nishan 

khushbu 

Friday, August 30, 2013

How I met you ! The journey...

I am in love, Yes I am in love finally.... How I met you is a long journey !
... it is a journey of true love, it was journey full of trouble, confusion, money loss, emotional loss, what not,Finally I met you! 

I know him since he born,  he is bit younger to me, (dam! he is cute) he always wanted to be mine, he tried a lot to come in my life, he used to send me messages using different mediums  and me being egoistic that if u are better I am best too so I will not be with you. now I accept that i was fool to had that ego. my loss of years! :(  


my ego of being best and knowing the fact of his uniqueness.. we never come close to each other, how foolish I was ... and now I understand what was I  missing in my life.. 

I  know  now, what love means , what is the importance of acceptance.. what is the importance of being someone's totally, how it feels when u r in love.. 

 I  am in love with you , I am falling day by day... more I know you , More I fall ... 
where were you so many year.. I wish I could have listen to you and accepted your proposal given by your father few years back...he told me, he tried to convince me that you are the best, you are the one meant for me. i was fool roaming around with useless ones... why I didn't understand you... 

u r so Perfect and now when I dare to accept the fact that u r just so perfect after meeting other jerks.. I love you 

... I am completing in you now.. I am spending time with you to know you better.. to know what u think.. how u react on my actions... 

.. and let me accept the fact that u surprises me always by your perfection.. 

I have decided to be yours now, and I want you to be mine forever  now.... Its just a matter of approval of my family and friends, however I know everybody will love you and will welcome you by whole heart.  
I hope , I wish we will always be together and will find out the solution of our every problem together with help of google... I know I can share my every thought with you and you will keep them secret with passwords.... 

I know you can be with me without having food for whole day... with all your concentration (battery life)

after seeing all other new ultrabooks in the market, i finally end up loving "MAC BOOK AIr" and we are getting engage soon ... 

wish us good luck and successful journey ... 

I will never forget the journey , confusion , trouble meeting you... 

You are awesome MAC!

Monday, March 25, 2013

Main Hu waisi, Jaisi main HOON!


मैं हु वैसी... जैसी!!


मै हु वैसी जैसी मै हु...
दुनिया जैसी मै बन जाऊ,
तो कहा रह पाऊँगी वैसी,
जैसी मैं हु
मैं हु वैसी जैसी मै हु...

मुझे प्यार है खुदसे ,
उसी तरह
जैसे है कुदरत से,
हां तुमसे फूलो से,
बारिश से,हवाओ से,
धूप से
छाव से
मै हु वैसी जैसी मै हु...
नहीं बनना है मुझे औरो सा..
बन जाओ जैसे दुनिया चाहे,
तो कैसे कहूँगी मैं,
मैं हु वैसी जैसी मै हु....
,
की है कई गलतिय मैंने तो,
खुशिया भी तो देती हु,
तभी तो अलग तुमसे,
इस दुनिया से हु,
मै हु वैसी जैसी मै हु...

Sunday, March 24, 2013

Nawya - बिंदिया की बिंदिया

Nawya - बिंदिया की बिंदिया



By PDPLOS payday loans

बिंदिया की बिंदिया

                                                     
24 March 2013

MOTHER-CHILD-55
बिंदिया ओ बिंदिया
माँ बुलाती लाड ,दुलार से बिंदिया
बापू भी बुलाते लाड दुलार से बिंदिया ,
....भाई बुलाता इतराते हुए बिंदिया ..
 “बिंदिया ओ मेरी बिंदिया “|

बिंदिया सबकी प्यारी ,राज दुलारी ,
हसंते हँसते जीती ,खेलती ,सपने बुनती ,
वो सबको हँसाती,बिंदिया वो प्यारी बिंदिया ||
... 

बचपन उसका ,हँसना उसका, खेलना उसका ,
लोगों को अच्छा ना लगा ,
वो बिंदिया ,कहां खो गयी वो बिंदिया ?

चीर चीर कर दिया,उसको रुलाके ही दम लिया |
सपनों का कच्चा सा  खिलौना उछला ,
उसका मासूम दिल तोड़कर पत्थर का बना दिया ,
वो रोई खूब रोई ,और रोते रोते वो हँसने लगी ||

माँ  आज भी बुलाती ‘बिंदिया ओ बिंदिया ‘
बापू प्यार से आवाज लगाते बिंदिया ओ बिंदिया
भाई इतराते हुए बुलाता बिंदिया ओ बिंदिया

बिंदिया अब नहीं आती
बिंदिया अब नहीं मुस्कुराती ,
वो बिंदिया की बिंदिया कोई चुरा ले गया
उसका बचपन को ,मासूम दिल को ,पत्थर का बना गया ||

बिंदिया ओ बिंदिया
एक बार तू लौट आ
फिर से कही नजर तो आ ||

Nawya - बिंदिया की बिंदिया

Nawya - बिंदिया की बिंदिया

Friday, March 15, 2013

Kishto me zindagi....


किश्तों में ज़िन्दगी ! 

मुझे किश्तों में  है ज़िन्दगी!
खुशिया भी किश्तों में थी ..... 
गम भी किश्तों में!
रोया भी मैंने किश्तों में है… 
हँसा भी मैंने किश्तों में !

हारके जीत भी किश्तों में मिली, और
जीत के बाद हार भी किश्तों में मिली !
और प्यर… 
हाँ प्यार भी किश्तों में मिला!

मेरी ज़िन्दगी एक कर्ज है ..
ना जाने किसपे , 
या किसका कर्ज है !
मैंने ज़िन्दगी से मुलाकात भी की है किश्ती में !!

जीना यहाँ किश्तों में !
खुदा तेरी रहमत को क्या शब्द दू ....
तूने मुझे दिखाई मौत भी है किश्तों में !!

किश्तों में ज़िन्दगी 
किश्तों की ज़िन्दगी ! 
एक उधार है शिन्दगि. 
एक लम्हा, जो जीना बाकी है, वो है ज़िन्दगी 

मेरे सपने, कोई लम्हा, कोई फासला,, कुछ दुरिया ,कुछ नज्दिकिया ...
 ये सबकी बाकी है किश्तिया !
मेरा कुछ और जीना, मेरा कुछ और मरना है बाकि… 
बाकी है कुछ और किश्तिया !.

Friday, February 22, 2013

झमेला ही झमेला है , 
इस झमेलो की दुनिया में, 
हमे आवशयक्ता है एक छलनी की, 
छलनी! हां वो ही छलनी जो छानती है,
कुछ जो चहिये वो रखती है, बाकी सब बहार की और गिरा देती है, 

कहा से लाये ये छलनी, मालुम किया ....
आज कल छलनी के दाम है बड़े महँगे, 
लोगो ने कहा आवेदन कीजिये,
लाइन में लगिए, 
फिर मिलेगी तुम्हे भी छलनी,

सही है भाई,
जो सही गलत का भेद बता दे,
उसका मौल तो होगा ही,
हमने भी एक आवेदन लगा दिया,
प्रिय छलनी कह कर,
एक आवेदन हमने भी लगा दिया,

महीनो के इन्तजार में,
एक ख़त आया,
छलनी ने मिलने को बुलाया,
सूट बूट पहन तैयार हो कर,
निकले हम ..
जरुरी था,
डर भी था,
कही नामंजूर हो गये हम तो ....

नमस्कार छलनी जी!!
वो बोली,
बैठिये!!
सुनाइए,
क्या चाहते है आप ..
मैंने कहा आपको चाहते है,
वो बोली, 
कारण  बताओ ...
मेरे कुछ सवालो का जवाब समझाओ,
पसंद आये तो दी जायेगी,
तुम्हे भी इनाम में एक छलनी,

डरते डरते हमने कहा पूछिए,
वो बोली, एक सवाल है बस मेरा,
बता दे मुझे, काम क्या है मेरा?

कुछ समझ नहीं आता, मम्मी पापा बनाते है संस्कारी, 
सरकारी अफसर करते है बैमानी,
बच्चो को लम्बी गाडी चहिये,
बीवी को हीरो का हार चहिये,
दफ्तर में घूस न खाऊ तो क्या करू?
मंदिर जाते फिर फूल चढ़ाऊ या रिश्वत,
समझ नहीं आता,
दुविधा को दूर करे, एक इसी ही छलनी चहिये,
मेरी जिंदगी में गलत सही अलग अलग कर दे,
बस इस काम के लिए छलनी चहिये,

हा हा हा!!!
तू है बड़ा सयाना ...
दुविधा तेरी हम दूर कर सकते है,
काम में तेरे हम आ सकते है,
लेकिन इसका फेसला करेगा कौन,
तुझे सही चहिये या गलत, 
फ़ैसला करेगा कौन,
तुझे चहिये क्या,
तू ये बता दे ......

वो बोला  ..
मुझे छलनी चहिये, जो गलत को सही कर दे,
सही को गलत कर दे छान के ....
बस ऐसा ही 'Multi Task' चहिये मुझे ....!!

Wednesday, January 30, 2013




Adhuri Kahani, Adhure panne, wo Adhure Shabd....

शुरुआत एक कहानी की, मैंने- तूने जो की थी ...
सदीओ पेहले नाम तेरा ,और मेरा लिखखे !
उम्र भर साथ निभाने की कसम जो हमने ली थी ... 
वो कहानी के शब्द , वो अधूरी किताब सामने आ गई 
मेरे सामने वो पूरानी यादे फिर से आ गई 

वो धुंधले शब्द , अधूरी दास्ताँ 
पूरी होनी होंगी ....
इसी जिद्द में मैं पागल हो गई !
जानते हुए , तू वहा नहीं है , 
तेरी खुशबु ही मिल जाए , 
इसी तलाश में , मैं आज हवा हो गई ! 

एक ही इन्तेजा है तुझे मेरी , 
ख़तम न कर इस दास्ताँ को तू , तोह मंजूर है !
मजधार में ना छोड़ , 
एक किस्सा इसका आज तू शुरू कर दे , तोह मंजूर है ! 

वो अधूरी किताब सोने नहीं देती, 
जब भी अख मुंदती हु, 
सामने एक साया बन आजाती है .... 
वो अधूरी लिख ,
कुछ तेरे , कुछ मेरे 
अधूरे सपनो को जिंदा करने कह जाती है ! 

तू सामने होक भी अब वो नहीं लगता, 
इस्सी अधूरी कहानी का तू अब पात्र नहीं लगता!
एक बार आखो को मुंड तू भी सुकून से ....
यकीं है , तू वोही बन जाएगा ..
इस कहानी को पूरा करने , मेरा हाथ थमने दोरा चला आएगा! 

इस अधूरी कहानी की दास्ताँ मैं किसे सुनु, 
मेरे होने का एहसास इन शब्दों को कैसे दिलाऊ?
अधूरी कहानी, 
अधूरे पन्ने,
  अधूरे शब्द, 
अधूरे ही रह गए .........................................


Friday, January 4, 2013

Wo Tasveer Banana Chahta tha meri ....





वो तस्वीर बनाना चाहता  था मेरी ....
वो मुझे बस देखा करता था कभी।।।। 
आखो में भर लेता मेरी हंसी, 
पढ़ लिया करता था वो , मेरे आखो की नमी
एक हरकत अखियो की होती , वो जान लेता पूरी कहानी मेरी ! 

वो  तस्वीर बनाना चाहता था मेरी 
रंगों को खोजता रहता, 
कभी फूलो के पास जाता, 
कभी इन्द्रधनुष से रंग मांगता ! 

वो  तस्वीर बनाना चाहता था मेरी 
दीवाना वो , नदियों की  उमंग डालना चाहता था वो 
तितलियो सी मस्ती भरना चाहता था वो ...
हंसी फूलो सी लगती उससे, 
वो तारीफ करना चाहता था मेरी ! 

वो  तस्वीर बनाना चाहता था मेरी 
हथेली पे, वो अपना नाम लिखना चाहता था मेरी 
सोचा करता , काली खता कहा से लाऊ????
जो  तेरे बालो को दर्शा सके 
मैं वो पहेली बारिश की बूंद कहा से लाऊ??
जो माथे की बिंदी बन सके तेरे ! 

पागल था वो दीवाना था वो, 
एक तस्वीर बने थी उसने मेरी 
मुझे खुदसे प्यार करना सिखाया था उसने, 
वो आखे कहा से लाऊ , 
वो तस्वीर बनाने वाला , मैं कहा से लाऊ???
वो आखे मैं कहा से लाऊ?????


Khali Panno ki dastan

खाली पन्नो की दास्ताँ कोण सुनाएगा 
जो लिखा नहीं गया आज तक, 
वो कोण पढ़ पायेगा 

एक कहानी फिर भी है वह, 
जो लिखी नही गई 
जो समजी नहीं गई 
सुने नहीं गई 
देखि नहीं गई 
एक कहानी फिर भी है वह!

ख़ामोशी की आवाज 
संगीत के सुर 
रात के लिए अँधेरा 
सुभह के लिए रौशनी कहा से लाऊ?
जो जिसका मालिक है , उसके लिए सौगात कहा से लाऊ ! 

भरदो काली स्याही से आसमान तोह क्या 
भरदो ख़ामोशी को भी शोर से तोह क्या 



Teri yaad me, teri hi yaad hu main


गुनाह करने की इजाजत दे दो आज मुझे 
जान लेना नहीं , जान देना है अज मुझे 
रहना मुश्किल हो गया उसके बिना 
यादो ने पागल किया है उसके इतना 

आज रोकना नहीं मुझे 
आज टोकना नहीं मुझे 
उसकी आखो में देखने की ख्वाइश है, 
कुछ सवाल अश्क बनके रहते है आखो में 
बहने दो हथेली पे उसके तोह उनका कोई जवाब आये 

वो आज खुश है जरुर 
लेकिन मेरी याद हर पल में होंगी 
मेरा यकीं है ये ... 
वो हस्त जरुर हा , लेकिन मुश्कान उसके लाबो पे मेरी ही होंगी 

सपने सारे सच किये होंगे  उसने अपने 
सपनो की सौगात   दी तोह मैंने थी 
हकीकत है , ज़िन्दगी मेरे बिना जीता है वो 
हर सांस , लेती मेरा नाम है उसकी 

सामने उसको होंगी  कोई और द्दिल्रुबा आज 
बंद आखो में तस्वीर सिर्फ मेरी है ...
उसकी  खिलखिलाती ज़िन्दगी में , 
मेरे ना होने का अफ़सोस आज भी है .... 

एक सवाल उसके ज़ेहन में उठता हर रोज़ है 
जिसका जवाब वो जनन्ना नहीं चाहता ....
क्युकी! 
उसका और मेरा वास्ता आब उस एक सवाल से जो है 
मैं क्यों नहीं उसकी, 
व क्यों नहीं मेरा।।।।।
जबकि महसूस वो करता आज भी सिर्फ मुझको है ....

उसके रूह में बस्ती थी मैं, 
मारके भी जुदा वो ना कर पायेगा।।। 
दुनिया वाले क्या समजेगे 
मेरे उसके साथ की दस्तान्न कोई नहीं लिख पायेगा 

एक जनम अभी आना है बाकी, 
जब हम भी होंगे साथ साथ 
इस्सी उमीद के साथ तोह जुदा होते है हर ज़नम 
वो ज़नम कभी तोह आएगा।। 
येही सोचके रूह में बसते है हम तेरे सामान 


तेरी याद में 
तेरी ही याद हु मैं 
तूने जो नाम दिया था।। 
आज भी वोही नाम से जानी जाती हु मैं !!!