Friday, March 15, 2013

Kishto me zindagi....


किश्तों में ज़िन्दगी ! 

मुझे किश्तों में  है ज़िन्दगी!
खुशिया भी किश्तों में थी ..... 
गम भी किश्तों में!
रोया भी मैंने किश्तों में है… 
हँसा भी मैंने किश्तों में !

हारके जीत भी किश्तों में मिली, और
जीत के बाद हार भी किश्तों में मिली !
और प्यर… 
हाँ प्यार भी किश्तों में मिला!

मेरी ज़िन्दगी एक कर्ज है ..
ना जाने किसपे , 
या किसका कर्ज है !
मैंने ज़िन्दगी से मुलाकात भी की है किश्ती में !!

जीना यहाँ किश्तों में !
खुदा तेरी रहमत को क्या शब्द दू ....
तूने मुझे दिखाई मौत भी है किश्तों में !!

किश्तों में ज़िन्दगी 
किश्तों की ज़िन्दगी ! 
एक उधार है शिन्दगि. 
एक लम्हा, जो जीना बाकी है, वो है ज़िन्दगी 

मेरे सपने, कोई लम्हा, कोई फासला,, कुछ दुरिया ,कुछ नज्दिकिया ...
 ये सबकी बाकी है किश्तिया !
मेरा कुछ और जीना, मेरा कुछ और मरना है बाकि… 
बाकी है कुछ और किश्तिया !.

5 comments:

  1. मेरे सपने, कोई लम्हा, कोई फासला,, कुछ दुरिया ,कुछ नज्दिकिया ...
    ये सबकी बाकी है किश्तिया !
    मेरा कुछ और जीना, मेरा कुछ और मरना है बाकि…
    बाकी है कुछ और किश्तिया !.

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  2. बहुत ही उम्दा खुशबु जी .....बहुत खुशी हुई आपका लिखा पढ़ है इतना अच्छा लिखा .................

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    1. mere jeevan ki kishtiyo ki dastan hai ye.... EMI

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  3. Beautiful....true fact of life....

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  4. Thank u Praveen ji , thank u amit

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