मुझे किश्तों में है ज़िन्दगी!
खुशिया भी किश्तों में थी .....
गम भी किश्तों में!
रोया भी मैंने किश्तों में है…
हँसा भी मैंने किश्तों में !
हारके जीत भी किश्तों में मिली, और
जीत के बाद हार भी किश्तों में मिली !
और प्यर…
हाँ प्यार भी किश्तों में मिला!
मेरी ज़िन्दगी एक कर्ज है ..
ना जाने किसपे ,
या किसका कर्ज है !
मैंने ज़िन्दगी से मुलाकात भी की है किश्ती में !!
जीना यहाँ किश्तों में !
खुदा तेरी रहमत को क्या शब्द दू ....
तूने मुझे दिखाई मौत भी है किश्तों में !!
किश्तों में ज़िन्दगी
किश्तों की ज़िन्दगी !
एक उधार है शिन्दगि.
एक लम्हा, जो जीना बाकी है, वो है ज़िन्दगी
मेरे सपने, कोई लम्हा, कोई फासला,, कुछ दुरिया ,कुछ नज्दिकिया ...
ये सबकी बाकी है किश्तिया !
मेरा कुछ और जीना, मेरा कुछ और मरना है बाकि…
बाकी है कुछ और किश्तिया !.

मेरे सपने, कोई लम्हा, कोई फासला,, कुछ दुरिया ,कुछ नज्दिकिया ...
ReplyDeleteये सबकी बाकी है किश्तिया !
मेरा कुछ और जीना, मेरा कुछ और मरना है बाकि…
बाकी है कुछ और किश्तिया !.
बहुत ही उम्दा खुशबु जी .....बहुत खुशी हुई आपका लिखा पढ़ है इतना अच्छा लिखा .................
ReplyDeletemere jeevan ki kishtiyo ki dastan hai ye.... EMI
DeleteBeautiful....true fact of life....
ReplyDeleteThank u Praveen ji , thank u amit
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