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बिंदिया की बिंदिया
24 March 2013 ![]() बिंदिया ओ बिंदिया माँ बुलाती लाड ,दुलार से बिंदिया बापू भी बुलाते लाड दुलार से बिंदिया , ....भाई बुलाता इतराते हुए बिंदिया .. “बिंदिया ओ मेरी बिंदिया “| बिंदिया सबकी प्यारी ,राज दुलारी , हसंते हँसते जीती ,खेलती ,सपने बुनती , वो सबको हँसाती,बिंदिया वो प्यारी बिंदिया || ... बचपन उसका ,हँसना उसका, खेलना उसका , लोगों को अच्छा ना लगा , वो बिंदिया ,कहां खो गयी वो बिंदिया ? चीर चीर कर दिया,उसको रुलाके ही दम लिया | सपनों का कच्चा सा खिलौना उछला , उसका मासूम दिल तोड़कर पत्थर का बना दिया , वो रोई खूब रोई ,और रोते रोते वो हँसने लगी || माँ आज भी बुलाती ‘बिंदिया ओ बिंदिया ‘ बापू प्यार से आवाज लगाते बिंदिया ओ बिंदिया भाई इतराते हुए बुलाता बिंदिया ओ बिंदिया बिंदिया अब नहीं आती बिंदिया अब नहीं मुस्कुराती , वो बिंदिया की बिंदिया कोई चुरा ले गया उसका बचपन को ,मासूम दिल को ,पत्थर का बना गया || बिंदिया ओ बिंदिया एक बार तू लौट आ फिर से कही नजर तो आ || |

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