Sunday, March 24, 2013

Nawya - बिंदिया की बिंदिया

Nawya - बिंदिया की बिंदिया



By PDPLOS payday loans

बिंदिया की बिंदिया

                                                     
24 March 2013

MOTHER-CHILD-55
बिंदिया ओ बिंदिया
माँ बुलाती लाड ,दुलार से बिंदिया
बापू भी बुलाते लाड दुलार से बिंदिया ,
....भाई बुलाता इतराते हुए बिंदिया ..
 “बिंदिया ओ मेरी बिंदिया “|

बिंदिया सबकी प्यारी ,राज दुलारी ,
हसंते हँसते जीती ,खेलती ,सपने बुनती ,
वो सबको हँसाती,बिंदिया वो प्यारी बिंदिया ||
... 

बचपन उसका ,हँसना उसका, खेलना उसका ,
लोगों को अच्छा ना लगा ,
वो बिंदिया ,कहां खो गयी वो बिंदिया ?

चीर चीर कर दिया,उसको रुलाके ही दम लिया |
सपनों का कच्चा सा  खिलौना उछला ,
उसका मासूम दिल तोड़कर पत्थर का बना दिया ,
वो रोई खूब रोई ,और रोते रोते वो हँसने लगी ||

माँ  आज भी बुलाती ‘बिंदिया ओ बिंदिया ‘
बापू प्यार से आवाज लगाते बिंदिया ओ बिंदिया
भाई इतराते हुए बुलाता बिंदिया ओ बिंदिया

बिंदिया अब नहीं आती
बिंदिया अब नहीं मुस्कुराती ,
वो बिंदिया की बिंदिया कोई चुरा ले गया
उसका बचपन को ,मासूम दिल को ,पत्थर का बना गया ||

बिंदिया ओ बिंदिया
एक बार तू लौट आ
फिर से कही नजर तो आ ||

No comments:

Post a Comment