Friday, February 22, 2013

झमेला ही झमेला है , 
इस झमेलो की दुनिया में, 
हमे आवशयक्ता है एक छलनी की, 
छलनी! हां वो ही छलनी जो छानती है,
कुछ जो चहिये वो रखती है, बाकी सब बहार की और गिरा देती है, 

कहा से लाये ये छलनी, मालुम किया ....
आज कल छलनी के दाम है बड़े महँगे, 
लोगो ने कहा आवेदन कीजिये,
लाइन में लगिए, 
फिर मिलेगी तुम्हे भी छलनी,

सही है भाई,
जो सही गलत का भेद बता दे,
उसका मौल तो होगा ही,
हमने भी एक आवेदन लगा दिया,
प्रिय छलनी कह कर,
एक आवेदन हमने भी लगा दिया,

महीनो के इन्तजार में,
एक ख़त आया,
छलनी ने मिलने को बुलाया,
सूट बूट पहन तैयार हो कर,
निकले हम ..
जरुरी था,
डर भी था,
कही नामंजूर हो गये हम तो ....

नमस्कार छलनी जी!!
वो बोली,
बैठिये!!
सुनाइए,
क्या चाहते है आप ..
मैंने कहा आपको चाहते है,
वो बोली, 
कारण  बताओ ...
मेरे कुछ सवालो का जवाब समझाओ,
पसंद आये तो दी जायेगी,
तुम्हे भी इनाम में एक छलनी,

डरते डरते हमने कहा पूछिए,
वो बोली, एक सवाल है बस मेरा,
बता दे मुझे, काम क्या है मेरा?

कुछ समझ नहीं आता, मम्मी पापा बनाते है संस्कारी, 
सरकारी अफसर करते है बैमानी,
बच्चो को लम्बी गाडी चहिये,
बीवी को हीरो का हार चहिये,
दफ्तर में घूस न खाऊ तो क्या करू?
मंदिर जाते फिर फूल चढ़ाऊ या रिश्वत,
समझ नहीं आता,
दुविधा को दूर करे, एक इसी ही छलनी चहिये,
मेरी जिंदगी में गलत सही अलग अलग कर दे,
बस इस काम के लिए छलनी चहिये,

हा हा हा!!!
तू है बड़ा सयाना ...
दुविधा तेरी हम दूर कर सकते है,
काम में तेरे हम आ सकते है,
लेकिन इसका फेसला करेगा कौन,
तुझे सही चहिये या गलत, 
फ़ैसला करेगा कौन,
तुझे चहिये क्या,
तू ये बता दे ......

वो बोला  ..
मुझे छलनी चहिये, जो गलत को सही कर दे,
सही को गलत कर दे छान के ....
बस ऐसा ही 'Multi Task' चहिये मुझे ....!!

6 comments:

  1. मुझे छलनी चहिये, जो गलत को सही कर दे,
    सही को गलत कर दे छान के ....
    शायद जिंदगी से बड़ी छलनी कोई नही जो समय समय पर गलत को छान कर हमारी हथेलियों में रखती है .बस हमें पहचानना आना चिहिये ...

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  2. ji sahi kaha praveenji... dhanaywad

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